Monday, 26 January 2026

मधुमती वर्णिक छंद

 (मधुमती छंद)
*मधुमती छंद* विधान:- "ननग" गणन की
'मधुमती'।। "ननग" :- 111 111 2 (नगण नगण गुरु) चार चरण, दो-दो चरण समतुकांत

लललल ललला ।

निकलिन घर ले।
सब झर-झर ले ।।
सिर धर करसा।
दहियन मरसा ।।
गउरस भरके ।
सखि सँग करके।।
बुलकत डगरी ।
सब मन अगरी।।
सखि खमखम ले।
हरि झमझम ले ।
सिर रख पगड़ी।
कर धर बँसुरी।।
हरि जब पँहुचे ।
जँह सखि उँहचे।।
अपलक रहिगें।
धन धन भइगें।।

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