(211 211 211 2)
लालल लालल लालल ला ।
सोवत जागत राम रटौं।
राम रटौं घनश्याम रटौं।।
कारज में दिन-रात खँटौं।
फेर नहीं जग में लपटौं।
रामदयाल दया करबे।
अंतस के दुविधा हरबे।।
कारज में दिन-रात खँटौं।
फेर नहीं जग में लपटौं।
रामदयाल दया करबे।
अंतस के दुविधा हरबे।।
No comments:
Post a Comment