Friday, 5 December 2025

आरक्षण घनाक्षरी

राष्ट्रपति बन गेव, मुख्यमंत्री बन गेव,
अधिकारी बन तुहीं जिला ला चलात हौ।
कर्मचारी बन गेव, बने आगू बढ़ गेव,
ठाँव-ठाँव आरक्षण के लाभ तुंँही पात हौ।
पढ़ गेव बढ़ गेव, आसन में चढ़ गेव,
गढ़ गढ़ गोठ रोठ पोठ गोठियात हौ ।
भाई संग लड़ गेव, चक्कर मे पड़ गेव,
नाक में रोये फेर तुमन नइ भुलात हौ। ।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव 

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...