देखौ हिन्दू एकता हा धमक देखात हे।
देखौ हिन्दू एकता के बल बदलत देश,
देखौ हिन्दू एकता ले राष्ट्रवाद आत हे ।
देखौ हिन्दू एकता ले राज खुसहाल होत,
देशद्रोहीमंडली के नाव हा बुतात हे।
देखौ हिन्दू एकता ले गाँव हा सजोर होत,
घर-परिवार के सुमता हा गढ़ात हे।
देखौ हिन्दू एकता ले भारत भाग जागत,
देखौ हिन्दू एकता हा धमक देखात हे।
देखौ हिन्दू एकता हा संस्कृति बचाय बर,
अंगद असन पाँव जबर जमात हे।
देखौ हिन्दू एकता हा भाखा बोली ला जोड़त,
देखौ हिन्दू एकता सभ्यता ला बचात हे ।
देखौ हिन्दू एकता हा धोवत कलंक देश,
देखौ हिन्दू एकता हा सुते ला जगात हे ।
देखौ हिन्दू एकता ले कइसे जुड़त देश,
देखौ हिन्दू एकता के पाग मे पगात हे।
देखौ हिन्दू एकता हा बैरी ला पियात पानी,
उधेन-उधेन पोनी कस धुनियात हे ।
देखौ हिन्दू एकता चोट्टा लबरा ला खदेड़,
बसुंदरा मन ला जभेड़ भगात हे।
देखौ हिन्दू एकता ले बड़े-बड़े थर होत,
ईटा के जवाब पथरा असन पात हे।
देखौ हिन्दू एकता हा बिला में खुसरे सब,
साँप अउ छछुन्दर ला हेर घिरलात हे।
देखौ हिन्दू एकता ले बैरी मन दुबकत,
देखौ हिन्दू एकता सबला मन आत हे।
देखौ हिन्दू एकता हा राष्ट्र निर्माण करे,
भारत के भुँइया नवा नेव ला मढ़ात हे ।
देखौ हिन्दू एकता हा अवध में रामलला,
मंदिर बनाके पूरा विश्व ला दिखात हे ।
देखौ हिन्दू एकता हा काशी के उदासी काट,
शिवपुरी के दिब्यता गौरव बहुरात हे।
देखौ हिन्दू एकता हा खोटहा सिक्का मन के,
रात के नींद दिन के चैन ला चोरात हे।
देखौ हिन्दू एकता हा धरमबिमुख बैरी,
मुड़ी के चढ़ैया ला गोड़तरी लात हे ।
देखौ हिन्दू एकता हा दुबक के रहौ तेला,
मुड़ उठा छाती तान जिये ला सिखात हे ।
देखौ हिन्दू एकता हा वंशवाद बर रुख,
जर ला उखान मही डार उपकात हे ।
देखौ हिन्दू एकता हा दिंयार बाँबी उझार,
बेन्दरा बिनास कर राहित छँड़ात हे। ।
देखौ हिन्दू एकता हा सूरा मन ला सपेट,
टूरा मन ला लपेट एक संग लात हे।
देखौ हिन्दू एकता हा पापी के टोंटा मुसेट,
धराके कटोरा विश्व भीख मँगवात हे ।
अरिदल छोट-मोट गिंगियात गोड़ लोट,
सोंट-सोंट सोंटा में घमंडी सोझियात हे।
देखौ हिन्दू एकता हा सुधारत मसमोट,
भ्रष्ट कष्ट डारत हे हंटर चलात हे।
शोभामोहन श्रीवास्तव
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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