Sunday, 30 November 2025

रेशम पितामरी बना दौ मोरे लाल।

कृपाण घनाक्षरी

बिरिजकुँवर बर कोंवर कोंवर सूत,
अंगरखा गढ़े माँघा बीनौ मोरे लाल।
चरखा चलावौ सूत कातौ बुनकर भाई,
रेशम पितामरी बना दौ मोरे लाल।
अलमल-झलमल धूप-छाँव पंछा धोती,
ढीक जरी-सोनहा लगा दौ मोरे लाल।
बीच-बीच बेल-बूटा फूल-पान ला उकेर,
चुक-चुक ले रंग रंगा दौ मोरे लाल ।।
सोन-पिंयर रंग छींट-बुंदकी सरभर,
छाप-छाप बस्तर बना दौ मोरे लाल।
पातर पातल पागा फेंटा अउ मुरेठा बर,
सतरंग लहर सजा दौ मोरे लाल। ।
शोभामोहन के हरि झम-झम ले पहिर,
मन मोहत रेंगत जोवै मोरे लाल।। 

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