Wednesday, 25 June 2025

मोर बदन कुम्हलात गो छत्तीसगढ़ी बिहावगीत

मोर बदन कुम्हलात गो छत्तीसगढ़ी बिहावगीत  

डंगडंग ले मड़वा रचाये मोर राजा ददा। 

डंगडंग ले मड़वा छवाये अमुवा के डरिया,
मोर बदन कुम्हलात गो।

कहिबे तौ बेटी शामियाना तनवाई देवौं।
सहि झन सुरुज के कोप ओ।
काबर तैंहर शामियाना तनवइबे तैं ददा मोरे।
कोरा में रख ले ना तोप गो।। 

हरदी के रंग मोर अंग ला रंगत अउ,
मउर गड़त मोर माथ गो।
अँचरा देवत दाई छँइहा करन फेर।
अगन बरत तन मोर गो। 

रंगबिरंगी करसा साजे हे सुवासिन।
दियना जलाये भर तेल ओ।
माँग भरागे हे रगरग ले मोर तो फुफू मोर सेंदुर सुधार ओ। 

रचनाकार- शोभामोहन श्रीवास्तव

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