Sunday, 2 June 2024

बीना धरे हे हाथ मा,साजे मुकुट अउ माथ मा

हरिगीतिका छंद

2212 , 2212 , 2212 , 2212

लालालला लालालला,लालालला लालालला

1/

बीना धरे हे हाथ मा,साजे मुकुट अउ माथ मा ।

गनपति बिराजत छेंव कर,अउ माँझ लक्ष्मी साथ मा ।

हे हाथ मा पुस्तक धरे,बइठे कमल के फूल हे

करधन सजे पैजन बजे, मोती जड़े अउ झूल हे ।

2/

नथली फभे हे सोनहा, मुंँदरी सुघर अँगरी सजे

गर हार दुलरी तीलरी, चूरी सुघर कंगन बजे ।

अँधियार मनके टारथे,गुन ग्यान दियना बारथे।

संसार के दुख मेटके, मन कुंदरा ला झारथे।

3/

सुर ला सजा धुन ला बजा, संगीत सिरजावै उही।

भव पार बर पतवार अउ,जग नाच नचवावै उही।

मन नाद अनहत ला बजा,साधक सुजन ला तारथे ।

बस मध्यमा अउ वैखरी, दुख ताप संकट टारथे ।

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