Sunday, 2 June 2024

सपनों के संग संग सजन भागती रही,

गजावली*


सपनों के संग संग सजन भागती रही,

तुम जागते रहे तो मैं भी जागती रही।


जब जब झुकायी सिर किसी मंदिर के द्वार पर,

लम्बी उमर तुम्हारे लिए माँगती रही।।


तेरी खुशी में अपनी खुशी जानके प्रियतम,

चेहरे में तेरे बार बार झाँकती रही।


सोलह सिंगार करके प्रतीक्षा में तुम्हारे,

खिड़की व द्वार बार बार झाँकती रही।


शोभामोहन

१०/०४/२०२२

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