पंथी गीत
गुरु ज्ञानी कर मिल, गुरु ज्ञानी कर मिल।
गुरुबर जोत ला जलाही झिलमिल।।
ज्ञान हर पबरित चोला के करैया हे,
चोला के करैया हे चोला के करैया हे।
चौरासी भँवरी ला अधरे तरैया हे।
अधरे तरैया हे, अधरे तरैया हे।
छोड़ सब चिलचिल छोड़ सब चिलचिल।
गुरुबर जोत ला जलाही झिलमिल।।
गुरु ज्ञानी कर मिल, गुरु ज्ञानी कर मिल।
गुरुबर जोत ला जलाही झिलमिल।।
भँवरी फदक के ये जीव दुख भोगे रे।
जीव दुख भोगे रे, जीव दुख भोगे रे।।
जग हर हाँसे थूकै गुरु करै सोगे रे।
गुरु करै सोगे रे, गुरु करै सोगे रे।।
झन मर तिलतिल झन मर तिलतिल।
गुरुबर जोत ला जलाही झिलमिल।।
गुरु ज्ञानी कर मिल, गुरु ज्ञानी कर मिल।
गुरुबल जोत ला जलाही झिलमिल।।
गुरु हा बताही बाट बन जा तैं चेला रे।
बन जा तैं चेला रे, बन जा तैं चेला रे।।
एकली बाट में कइसे जाना हे अकेला रे।
जाना हे अकेला रे, जाना हे अकेला रे।।
हीरासुध कर दिल हीरासुध कर दिल।
गुरुबर जोत ला जलाही झिलमिल।।
गुरु ज्ञानी कर मिल, गुरु ज्ञानी कर मिल।
गुरुबर जोत ला जलाही झिलमिल।।
शोभामोहन सरन गुरुबर ज्ञानी के।
गुरुबर ज्ञानी के, गुरुबर ज्ञानी के।।
लाज ला बचाही उही अधर अड़ानी के।।
पानी में मछरी ढिल, पानी में मछरी ढिल।।
गुरुबर जोत ला जलाही झिलमिल।।
गुरु ज्ञानी कर मिल, गुरु ज्ञानी कर मिल।
गुरुबर जोत ला जलाही झिलमिल।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
बइसाख अंधियारी तिथि दसमी
विक्रम संवत २०८१
शुभस्थान-महुदा
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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