काला ले जाबे धर के(राग ठुमरी खमाच )●
महल अटारी पिया पियारी।
खेती बारी धन रोजगारी।।
हाड़ा हपट दरर के ।
काला ले जाबे धर के ।।
हाड़ माँस बहत नदी धरनी।
काया तोर बिकट बैतरनी।।
पार लगा कुछु कर के।
काला ले जाबे धर के।।
नता लमेरा जीव उडे़रा।
सपना के ये उतरे घेरा।।
बगरत जही उझर के।
काला ले जाबे धर के ।।
होवय भल ते होय छमन्छल।
शोभामोहन नाम जपत चल।।
काल लेगही सुरर के।
काला ले जाबे धर के।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
१४/०५/२०२१●काला ले जाबे धर के(राग ठुमरी खमाच )●
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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