Sunday, 3 March 2024

छत्तीसगढ़:भुँइया (दोहा)

छत्तीसगढ़:भुँइया (दोहा) 

सरग बरोबर लागथे, छत्तीसगढ़ के गाँव। 
गली गुड़ी तरिया नहर, पीपर लिमुवा छाँव।।             

धूसर धरती रंग अउ, नीला बरन अगास।
फूल पान रुखवा सुघर, दसे गलीचा घास।। 

कौशिल्या जनमे इहाँ, महतारी प्रभु राम। 
भाँची भाँचा के तभे, करथन हमन प्रनाम।। 

फेंटा ला बाँधे ददा, दाई ढ़ाके मूड़।
माड़ी भर पानी भरे, खेत कमावै बूड़।। 

चीला मुठिया अउ फरा, माई पिल्ला खान। 
राख हिरासुध जीव ला, कनिहा टूटत कमान।। 

हरियर खेती खार के, खाथन भाजी साग।
गाथन कर्मा ददरिया, अउ सहराथन भाग।। 

कुटकी कोदो धान बों, सेथन हम दिन रात। 
छत्तीसगढ़ भुँइया सरग, अलग इहाँ सब बात।। 

पागा मूड़ी बाँध के, देवत मेछा ताव।
गुड़ी गाँव में बइठ के, करथे बबा नियाव।। 

बखरी बारी खेत में, बोथन भाजी साग।
पहुना के सत्कार कर, बड़ सहराथन भाग।। 

काँटा खूँटी बीन के, सखलन खेती खार।
माथ नवा भुँइयारतन, करथन निहर जोहार।। 

बलकर बीर सपूत बड़, जन्मे येकर कोख।
चतवारिन सुख बाट ला, बन बदउर सब रोख।। 

वीर नरायण के असन, बेटा ला जनमाय।
फाँसी चढ़ जे देश बर, बलिदानी कहलाय।। 

धान गहूँ सरसों चना, ओन्हारी के खार। 
गाय गरू सेवा धरे, करथन बड़ किरवार ।। 

पंडित सुंदरलाल के, कलम बने तलवार।
जीयत भर झगरत रहिस, अंग्रेजी सरकार।। 

छंदबद्ध साहित्य के, उरथैया महराज।
लिखिस दानलीला सुघर, राजिम धाम बिराज।। 
              
जनकवि कोदूराम के, कहे सियानी गोठ।
बाट देखात समाज ला, सुघर रोठ अउ पोठ।। 

भाखा के बढ़वार बर, उरथाये अभियान।
छन्द के छ गुरुवर निगम, बाँटत पबरित ज्ञान।। 

लोरिक चंदा के कथा, ढोलामारू गीत।
राउत नाचा रहस अउ, सुआगीत के रीत।। 

कतिक बतावौं अकथ हे, छत्तीसगढ़ के बात।
मया दया के सबरदिन, होत इहाँ बरसात।। 

शोभामोहन रातदिन, भाग अपन सहरात।
ये भुँइया के गमक ला, चारोखुँट बगरात।। 

शोभामोहन श्रीवास्तव

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