Tuesday, 26 March 2024

जुग जुग जियै मोरे भइया, जुग जुग भउजी हमार।

(बर तरी खड़े हे धुन)
जुग जुग जियै मोरे भइया, जुग जुग भउजी हमार।
जुग जुग जियैं भतीज भतीजी, जुग जुग कुल परिवार।।

जुग जुग बरै कुल दियना, जुग जुग जग रहै नाम।
तीरथ धामे मोरे मइके, घेरीबेरी करौ परनाम।।

जुग जुग जियै मोरे दाई, जुग जुग जियै ददा मोर।
बड़ा बड़ी जुग जुग जियै मोरे, सुखभागी हों अपार।
जुग जुग जियै कका काकी, निसदिन करैं बढ़वार।

जुग जुग जागे देवधामी मन, रहिहौ उँकर सहाय।
जुग जुग नाम चलै जग में, सुख में बेरिया पहाय।

शोभामोहन श्रीवास्तव
फागुन अंजोरी पाख दुइज, विकक्रम संवत २०८० 

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...