Friday, 16 February 2024

भुगतेगी पीढ़ियांँ छोड़े हो भगवान तुम।।

भुगतेगी पीढ़ियांँ छोड़े हो भगवान तुम।।

घनाक्षरी

साड़ी छोड़े चुन्नी छोड़े,बिन्दी छोड़े चूड़ी छोड़े,
एक एक कर छोड़े सारी पहचान तुम।
कुमकुम तिलक छोड़े,धोती छोड़े कुर्ता छोड़े, 
आधुनिक सेकूलर बनने महान तुम।।
मठ व मंदिर छोड़े, क्लब किटी नाता जोड़े,
छोड़े दान पुण्य और में नदी स्नान तुम।
संस्कृत भाषा को छोड़े, हिन्दी से भी मुख मोड़े,
अंग्रेजी को सीखने में लगा दिये प्रान तुम।
सभ्यता संस्कृति छोड़े,पूर्वी प्रकृति छोड़े,
भुगतेगी पीढ़ियांँ छोड़े हो भगवान तुम।।

शोभामोहन श्रीवास्तव 

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