काल बता के तो नइ आवै
सबो मरे बर जनमे हावै।
काल बताके तो नइ आवै।।
आँखी बाँधे टोपा प्रानी ।
हे फँदाय चौरासी घानी।।
गिंजरत अँखमुन्दा मनमानी।।
जबर बात नइ होत गलानी।।
ठलहा बइठे आल्हा गावै।
काल बताके तो .....1/
जीव जगत के नता रुँधाये।
बिन डोरी-डाँवा छंदाये।।
बंधन बारिक अगम जनावै।
बिरला कोनो जाने पावै।।
बाँचे भेंड सरीख झपावैं।
काल बता के तो.....2/
शोभामोहन श्रीवास्तव
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