Friday, 5 May 2023

घनाक्षरी (नकली गाँधी नेहरू की सच्चाई)

 (घनाक्षरी) चेत लगा अब ईश्वर कोती 
(१)
रे मन चंचल जा गिंजरे झन,
चेत लगा अब ईश्वर कोती ।
हे दुख ना सुख ये जग मा सुन,
भाव बियापत जम्मो जोती।
एक समान घटै घटना सब,
फेर बनै दुख या सुख सोती।
जेन दशा मन हा जनवावय,
तेन ल जान सकै यह होती।
(२)
साध नहीं पुरही बुड़बे दुख,
साध पुरे सुख मा बउराबे ।
साध सधाय बँधाय रहे बर,
आगर आगर आस लमाबे ।
जान दही कपसा झन खा सुन,
फेर नहीं मिलही पछताबे ।।
जेन हवै सबले बड़का सुख,
वो सुख ला तब तो सपड़ाबे ।
पार सबो सुख के दुख के रहि,
अंतस देव परान जगाबे ।
(३)
जे नत ला कहि सुंदर रूपस,
मोह मया ममता अगराबे ।
छूटत जीव मशान चले बर,
प्रीत भुला अबड़े लउहाबे ।
डार चिता पँचलाकड़िया अउ,
पाँत धरे नदिया म नहाबे ।
आ घर पालथिया बइठे अउ,
पेट लगे अगनी ल बुताबे।
शोभामोहन
१०/०५/२०२०


घनाक्षरी



जवाहर लाल जी के पिताजी हैं मोतीलाल।
माताजी उनकी थुसुबाई रहमान है।
पत्नी कमला कौल से एक बेटी जनमी ,
उमैमाबेगम है इंदिरा पहचान है।
जिसके पति का नाम जहाँगीर फिरोज है,
दो बेटे उनके राजीव संजय खान है।
तीन पीढ़ी राज किये भारत में झूठबल,
भंडाफोड़ से माँ बेटा बेटी परेशान हैं।।

शोभामोहन श्रीवास्तव
०५/०५/२०२३

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