Thursday, 16 March 2023

rag aadharit bhajan

 

असल बात नइ जानै जनइया(राग पहाड़ी )

कोन तीर तोर तट बैतरनी,

कोने मेर मुँहाने जनइया।

असल बात नइ जाने जनइया।।

हाड़ माँस अउ खून नदी ये,

चोला घाट डुबाने जवइया।

असल बात नइ जाने जनइया।।

तैं बुड़बे तब ईश उफलही,

होके प्रकट सीधाने धुनइया।

असल बात नइ जाने जनइया।।

शोभामोहन प्रभु सुमिरन कर,

उप्पर उठन ऊँचाने भजइया।

असल बात नइ जाने जनइया।।

शोभामोहन

काला ले जाबे धर के(राग ठुमरी खमाच )

महल अटारी पिया पियारी।

खेती बारी धन रोजगारी।।

हाड़ा हपट दरर के ।

काला ले जाबे धर के ।।

हाड़ माँस बहत नदी धरनी।

काया तोर बिकट बैतरनी।।

पार लगा कुछु कर के।

काला ले जाबे धर के।।

नता लमेरा जीव उडे़रा।

सपना के ये उतरे घेरा।।

बगरत जही उझर के।

काला ले जाबे धर के ।।

होवय भल ते होय छमन्छल।

शोभामोहन नाम जपत चल।।

काल लेगही सुरर के।

काला ले जाबे धर के।।

शोभामोहन श्रीवास्तव

१४/०५/२०२१

भजन बिन भागत जावत बेर

राग पहाड़ी (ताल केरवा)

भजन बिना भागत जावत बेर

कभू माथ कभू हाथ पिरावत,

कभू रहत मन ढ़ेर।

भजन बिना भागत जावत बेर।।

अहम भरे माटी के पुतरी,

गरजत बनके शेर।

भजन बिना भागत जावत बेर।।

रो सतधारा होत गुजारा,

चेतत नइ मन फेर।

भजन बिना भागत जावत बेर।।

आगी अँधना चौहद बँधना,

चूल्हा दूल्हा मेर।

भजन बिना भागत जावत बेर।।

शोभामोहन छोड़ छाड़ सब,

मन प्रभु चित्र उकेर।

भजन बिना भागत जावत बेर।।

शोभामोहन श्रीवास्तव

१४/०५/२०२१

राग बरहंस ताल धमाल (शिव बिहाव भजन)

नाथ।!भगतिन सोहाग सिरजाये।

जगतबाप हर जगजननी ला,

चलत हवय बरे बिहाये।

नाथ।!भगतिन सोहाग सिरजाये।

अनमन जनमन कहूँ न जानै,

जेन सवाँगे हे आये।

नाथ।!भगतिन सोहाग सिरजाये।।

कठिन तपस्या के फल देये,

अउ जीव तोस कराये।

नाथ।!भगतिन सोहाग सिरजाये।।

वेद पढ़त सब ऋखि मुनि मन,

नारद बीना ला बजाये।

नाथ।!भगतिन सोहाग सिरजाये।।

ब्रह्मा अउ हरि शिवशंकर के,

जय जयकार ला लगाये।

नाथ।!भगतिन सोहाग सिरजाये।।

भूत प्रेत मन नाचत गावत,

हुरमत हे गजब मताये।

नाथ।!भगतिन सोहाग सिरजाये।।

तुतरू डफड़ा माँदर बाजत,

फूल स्वर्ग तिय बरसाये ।

नाथ।!भगतिन सोहाग सिरजाये।।

शोभामोहन ओला भजथे,

जगत डहर ले ढ़ेरियाये।।

नाथ।!भगतिन सोहाग सिरजाये।।

शोभामोहन

दादरा छत्तीसगढ़ी बंध

१३ मात्रा में निबद्ध

दौंरी असन फँदाय मन, गुरु ज्ञान नइ धरे।

मनखे जनम ल पाय तौ, झन तो बुटो अरे।।

आँखी नहीं चिन्हार बर, माते हवस परे।

घट घट में ब्रम्हजोत तो, जुगजुग ले हे बरे।।

निरबुध करनी देख के, बेरा बिकट छरे।

पथरा मूँड़ी के गोड़ मा, तै तो पटक डरे।

कोनो न पाय पार हे, अतका बिसाल हे।।

सबो लोक के गोसान वो, जग उजियाल हे।।

प्रभु के सृजन निहार के, अचरज नहीं भरे।

सबमे उही बिराज के, बूता करात हे।

हँसवात हे रोआत हे, बुध ला हरात हे।।

पाँचो सुतत्व भोग के, जोहार नइ करे।।

चंदा सूरुज नक्षत्र ला, ग्रह ला बनाय रे।

अंड पिंड ब्रम्हांड ला, अँगरी नचाय रे।।

उबरे नही सधाय तैं, दहकत गरब भरे।

शोभामोहन श्रीवास्तव

०२/०५/२०२१

राग पहाड़ी हिन्दी बंध

चलो मन मेरे, जग के चलो उस पार ।

है उस पार अपार सार प्रभु, तो इस पार असार।

चलो मन मेरे, जग के चलो उस पार ।

समय बीत के रीत गया है, उलझन खड़ी हजार।

चलो मन मेरे, जग के चलो उस पार ।

सुख दुख के संवेदन तन मे, निर्मल मन की धार।

चलो मन मेरे, जग के चलो उस पार ।

शोभामोहन

०२/०५/२०२१

राग केदार छत्तीसगढ़ी बंध

उवत बुड़त ले करम करइया।

एक घड़ी भज ले रघुरइया...............

चार पहर ला सुतत पहइया।।

एक घड़ी भज ले रघुरइया...............

महल टेका धन धान धरइया।

एक घड़ी भज ले रघुरइया...............

सात समुन्दर पार करइया।

एक घड़ी भज ले रघुरइया...............

पंछी असन अगास उड़इया।।

एक घड़ी भज ले रघुरइया................

जे शोभामोहन गोसइया।

एक घड़ी भज ले रघुरइया...............

गजब दयालू पार लगइया।।

एक घड़ी भज ले रघुरइया..............

शोभामोहन श्रीवास्तव

२७/०४/२०२१

(राग सारंग अभ्यास छत्तीसगढ़ी बर बंध)

करनी अजगुत भगवान के।

पल पल बिपल अफल व सुफल फल,

जीवधर दै फल जान के।

करनी अजगुत भगवान के।।

मारन तारन पोसन राखन,

एकहत्थी गुनवान के।

करनी अजगुत भगवान के।।

करमन के अनुहारी सुख दुख,

देवत चिन्ह पहिचान के।

करनी अजगुत भगवान के।।

शोभामोहन उही परम प्रभु,

चेत लगा शुभ ठान के।

करनी अजगुत भगवान के।

शोभामोहन श्रीवास्तव

२६/०४/२०२१

 

 

(राग भैरवी छत्तीसगढ़ी अभ्यास बर बंध)

अगन रहै नइ बिगन जरोये।

इन्द्रिय के इही करम कहानी,

दुख के बीजा बोये।

अगन रहै नइ बिगन जरोये..........

दरस परस रस गंध सबद मिल,

बुध अउ चेत बरोये।

अगन रहै नइ बिगन जरोये..........

काम ललाय महादुख भागै,

तिसना जीव कलोये।

अगन रहै नइ बिगन जरोये........

हरि भज हरि भज शोभामोहन,

सुख ला सार मलोये।।

अगन रहै नइ बिगन जरोये.........

शोभामोहन श्रीवास्तव

१६/०४/२०२१

(राग सोरठ छत्तीसगढ़ी बंध)

सबके सुख हे आने आने

गुनधर ज्ञान धरे सुख पाथे,

अउ मूरख दुख ठाने। सबके सुख हे आने आने

भगत भजन गावत सुख पाथे,

गरबी गरब उड़ाने। सबके सुख हे आने आने

अधम मनुख के सुख चारी में

संत गुनान उचाने। सबके सुख हे आने आने

भाँवरमाछी के सुख मधु में,

माछी घाव घिनाने। सबके सुख हे आने आने

ककरो सुख हे शहर पहर मा,

ककरो गाँव गोटाने। सबके सुख हे आने आने।

शोभामोहन हरि सुमिरन कर,

सुख पाये मनमाने। सबके सुख हे आने आने

शोभामोहन श्रीवास्तव

२६/०४/२०२१

(राग बिलावल छ.ग. अभ्यास बर)

तब धरनीतल बिपत परै।

साधू ला जब रक्सा मारै,

तब धरनीतल बिपत परै।

तब धरनीतल बिपत परै..................

काल मूँड़ मा चढ़ के नाचै,

मनखे मा रक्सा संचरै।

तब धरनीतल बिपत परै..............

जीयत गउ के खाल ओदारैं,

यवन अति अधम करम करै।

तब धरनीतल बिपत परै................

पाप बाट मा निधड़क रेंगत,

जब मनखे चिटको न डरै।

तब धरनीतल बिपत परै................

बाल बृद्ध अउ असक मनुख हन,

निरघट निचट असोग चरै।

तब धरनीतल बिपत परै....................

मंदिर टोरे मूर्तिभंजक,

जब रकसा कस रूप धरै।

तब धरनीतल बिपत परै....................

शोभामोहन प्रभु सत्ता ला,

मनखे हर जब जब निंदरै।

तब धरनीतल बिपत परै......................

शोभामोहन श्रीवास्तव

२६/०४/२०२१

(राग कल्याण छत्तीसगढ़ी अभ्यास बर)

परम उदाली लीलाधर!!

जेन भगत जइसन बर माँगिस,

तेला देइस तइसन बर। परम उदाली.......।

कहिस यशोदा बेटा बन जा

कोरा में खेलाये बर।

रनबन खेलिस कोरा अँगना।

अमरित रस बरसाये बर।।परम उदाली.....।

जेन भगत हर कहिस सजन बन,

तन मन साध बुताये बर।

गोपी ग्वालिन उन ला करके,

आगे रास रचाये बर।। परम उदाली...........।

जेन भगत हर कहिस सखा बन,

संग खेले इतराये बर।

खेलिन कूदिन भाँड़ी फाँदिन,

दूध दही चोराये बर।। परम उदाली .........।

जेन भगत हर कहिस झगरहूँ,

हार सरग मा जाये बर।

ओकर संग करिस झगरा प्रभु,

मारिस सरग पठाये बर। परम उदाली........।

भगत कहिस जब प्रभु ला खाहूँ,

हाजिर भइस खवाये बर।

शालीग्राम बनिस भगवंता,

जीव भगत जुड़वाये बर।।परम उदाली........।

शोभामोहन श्रीवास्तव

१८९/०४/२०२१

(राग जैतश्री छत्तीसगढ़ी मा अभ्यास बर)

अनफलित हाय झन जनम जाय।

अति दुर्लभ मनखे तन पाके,

जगत पाग में रहि पगाय।अनफलित हाय.....!!

चारो पन के अपन बिटौना,

जीव फँदाय दँउरी जनाय।अनफलित हाय.......!!

भटकत चटकत चारो मूड़ा,

प्रभु कोती भर मन न जाय।अनफलित हाय.....!!

चित्त में चिंता उफलत बूड़त,

भूलन खुँद जीव दुख बियाय।अनफलित हाय...!!

सब दुख मेटनहार जगतपति,

बरजत तब ले मन धँवाय। अनफलित हाय ....!!

सबो उमर गै धन जन जोरत,

संग फेर तीखा न जाय।अनफलित हाय......!!

हाथ मींजत आखिर बेरा मा,

जमो जोड़ सुन्ना जनाय। अनफलित हाय......!!

शोभामोहन बेरा ढ़रकत,

गति बनाय बर कर उपाय।अनफलित हाय.....!!

शोभामोहन श्रीवास्तव

 

राग धनाश्री (छत्तीसगढ़ी गायन बर)

शिव सुमरनी

तोर शरण हौं शंकर भोला।

राम भगति बर दे दे मोला।।

काशी मरन दूसर बर माँगौं,

पार लगाये चोला।

तैं जीते हस तीनो पुर ला,

बइठे मगन अबोला।।

तोर शरण हौं शंकर भोला।

जीव जगा दे लगन लगा दे,

ये जग आगी गोला।

कामदेव के भस्म करइया,

सतबुध दे दे मोला।।

तोर शरण हौं शंकर भोला।

साध परम पद माँगै जोगी,

मैं नइ जानौ ओला ।

महाभाग ले जनम मिले हे,

मनखे देंह अमोला।

तोर शरण हौं शंकर भोला।

हे काशीपति हे कैलाशी,

सुमरौं सब तज तोला।

शोभामोहन तोर रहत ले,

अउ नइ बदलै खोला।

तोर शरण हौं शंकर भोला।

शोभामोहन श्रीवास्तव

०३/०४/२०२१

 

 

राग आसावरी (छत्तीसगढ़ी गायन बर)

इहें सरग अउ इहें नरक हे।

सब करनी फल बिगन फरक हे।।

इहें सरग अउ इहें नरक हे। (मुखड़ा)

बेरा सबके पतिया खोलत,

सब कोती गिंजरत निधड़क हे।

इहें सरग अउ इहें नरक हे।।(मुखड़ा)

पवन अँजोरी छूवत चोला,

करनी कथा लिखत अनथक हे।

इहें सरग अउ इहें नरक हे। (मुखड़ा)

ककरो पनउतार बानी हे,

अउ ककरो मुहरन लकलक हे।

इहें सरग अउ इहें नरक हे। (मुखड़ा)

शोभामोहन चेत जा अब तो,

न्याय प्रभु के गजब कड़क हे।।

इहें सरग अउ इहें नरक हे। (मुखड़ा)

शोभामोहन श्रीवास्तव

०५/०४/२०२१

 

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