दंदरत बिरहिन दुखियारी
(बिरहा गीत)
घन घपटत घटा घनन घनन घन,
घन घपटत घटा घनन घनन घन,
बादर गरजत बड़ भारी।
बनठन ठनगन कर मनमाने मन,
बनठन ठनगन कर मनमाने मन,
बोंवत घनसुख के क्याँरी।।
जल बरसत हे झरझर झरझर,
जल बरसत हे झरझर झरझर,
छमछम ठमकत रुख डारी।
तड़तड़ तड़तड़ चमकत बिजली,
तड़तड़ तड़तड़ चमकत बिजली,
गड़गड़ गड़ मेघा मतवारी।।
सरसर सरसर जब पवन करत,
सरसर सरसर जब पवन करत,
फरफर फहरत हे साड़ी।
धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छाती,
धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छाती,
दंदरत बिरहिन दुखियारी।।
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309
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