Thursday, 2 March 2023

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बिहाव सोहाग गीत (लोकगीत)
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बाजै बाँस भोंगरी, बाजै झल्लर डफली।
आज बिलरी के माँग में मोर हीरा बसे ना।।
सबके सोहाग हावै अलवा जलवा अउ,
फूफू के देये सोहाग अटल हे ना।
बाजै बाँस भोंगरी, बाजा झल्लर डफली।
आज बिलरी के माँग में मोर हीरा बसे ना।।
सबके सोहाग हावै अलवा जलवा अउ,
मामी के देये सोहाग अटल हे ना।
बाजै बाँस भोंगरी, बाजै झल्लर डफली।
आज बिलरी के माँग में मोर हीरा बसे ना।।
सबके सोहाग हावै अलवा जलवा अउ,
भउजी के देये सोहाग अटल हे ना।
बाजै बाँस भोंगरी , बाजै झल्लर डफली।
आज बिलरी के माँग में मोर हीरा बसे ना।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
१५//०३/२०२२
(सोझ होय के घाटा अउ फायदा) जलहरण घनाक्षरी
टेड़गा चलैया मन सबो सुख सपड़ाथे,
बड़ दुख पाथे ये जग मा मनखे सरल।
टेड़गा रूख ला कोनो काटे बोंगे नेतै नहीं,
सोझ रुख ऊपर टँगली आरी जाथे चल।
टेड़गा मनुख देख सबो झन छटियाथे,
कोनो हा सरेखै नहीं सोझ मनखे के भल।
चलता पुरजा बर छाहित लछमी घलो,
सोझ संग अजमाथे दई घलो बल छल।
टेड़गापना में सुख नंगत गुनान कर,
टेड़गा डहर झन अरे मोर मन चल।
जग सिरजन सब सोझहा के सिरजे ये,
सोझबाय रहे कर सत मा टेके अटल।
सोझ पथरा मा रे उपकथे प्रभु के रूप,
जड़ता जीयत जागत हो जाथे सुफल।
सोझ बाँस बँसुरी सजथे ओंठ मोहन के,
गुरु अउ गोविंद ला भाथे मनखे सरल।।
शोभामोहन
चरन सतगुरु के, चित्त रख ले(राग भूपाली)
चरन सतगुरु के, चित्त रख ले।
परम अलौकिक सब सुख चख ले।।
चरन सतगुरु के, चित्त रख ले।
सतगुरु समरथ अलख लखैया,
सतगुरु समरथ अलख लखैया,
गुरु पगचिनहा चल हरि लख ले।।
चरन सतगुरु के, चित्त रख ले।
बाती तेल बिन दीया जलैया,
बाती तेल बिन दीया जलैया,
लकलक होये सिख अउ नख ले।
चरन सतगुरु के, चित्त रख ले।
शोभामोहन
१८/०२/२०२२
महुदा

शरन प्रभु के मन चल रे (राग भूपाली)
शरन प्रभु वर के, मन चल रे।
नाम सुमरनी में, जीव भल रे।।
शरन प्रभु वर के..............… ।
प्रभु सुमिरन कर सब सुख पाबे२
तन मन हो जाही निर्मल रे।।
शरन प्रभु वर के..............… ।
जग मग चलबे बिकट बिपत अउ,
प्रभु सुमिरन में जन्म सुफल रे।
शरन प्रभु वर के..............… ।
सुधर जही गत, रहि जाही पत,
मिट जाही मन के हलचल रे।
शरन प्रभु वर के..............… ।
जन्म जन्म के घाट हे कइहा,
गोड़ खोभ चल निकल संभल रे।
शरन प्रभु वर के..............… ।
अनगिन त्रिय नर, गइन अलखघर,
नाचत गावत सुमिरन बल रे।।
शरन प्रभु वर के..............… ।
शोभामोहन
१८/०२/२०२२
महुदा
ममतामयी भाभी रमादेवी के (जसगीत)
रगरगात कुल वंश जनम धर,
नाम रमा देवी धरवाय।
सुजखाअन सुजान सुभाष सुवारी,
बनके सब बर सुख सिरजाय ।।
होय बिहाती अउ ससुराती,
लछमी जइसे पाँव मड़ाय।
धन वैभव सुख सम्पत करके,
वंश बेल ला सुघर बढ़ाय ।।
रगरगात कुल वंश जनम धर,
नाम रमा देवी धरवाय।
सबला एक एक बरोबर माने,
भेद कभू मन मा नइ लाय।
अपन बिरान सबो बर भौजी,
निर्मल मया दया बरसाय।।
रगरगात कुल वंश जनम धर,
नाम रमा देवी धरवाय।
सीरजम कुल में जनम धरे तै,
नाम रमा देवी धरवाय।
तोर दुआरी जेने आइस,
आस पुरोय खवाय पियाय।
हाँस बोल के मया बढ़ाये,
कभू न ककरो जीव दुखाय।
रगरगात कुल वंश जनम धर,
नाम रमा देवी धरवाय।
धर्म कर्म बर दान पुन्य बर
बढ़चढ़ के तै आगू आय।
तुलसी बिरवा पानी देके,
साँझ बिहनिया दिया जलाय।।
रगरगात कुल वंश जनम धर,
नाम रमा देवी धरवाय।
दुख सुख सबले दुरिहा दुरिहा,
रहे जगत मा बिन लपटाय।।
रगरगात कुल वंश जनम धर,
नाम रमा देवी धरवाय।
नाम रमा अउ काम रमा कस,
सदा तोर निर्मल व्यवहार ।
तोला बंदौ सुरता करके,
घेरी बेरी करँव जोहार।
रगरगात कुल वंश जनम धर,
नाम रमा देवी धरवाय।
धर सोहाग जग लात मार के,
परमधाम तैं गये सिधार।
सरग लोक के देबी देवता,
लेगिन साज सोला सिंगार ।।
रगरगात कुल वंश जनम धर,
नाम रमा देवी धरवाय।
तोर संग के रंग चुटुक हर,
अंतसखोली मोर थपाय ।
शोभामोहन दया मया ला,
तोर सुरता कर कर जस गाय ।।
रगरगात कुल वंश जनम धर,
नाम रमा देवी धरवाय
शोभामोहन
१३/१०/२०२१
पाटन
राग सोरठ छत्तीसगढ़ी अभ्यास बर
सबके सुख हे आने आने
गुनधर ज्ञान धरे सुख पाथे,
अउ मूरख दुख ठाने। सबके सुख हे आने आने
भगत भजन मा बुड़ सुख पाथे,
गरबी गरब उड़ाने। सबके सुख हे आने आने
निंदा चारी अधम मनुख अउ,
संत गुनान उचाने। सबके सुख हे आने आने
भाँवरमाछी के सुख मधुरस
माछी घाव घिनाने। सबके सुख हे आने आने
ककरो सुख हे शहर पहर मा,
ककरो गाँव गोटाने। सबके सुख हे आने आने।
शोभामोहन हरि सुमिरन कर,
सुख पाये मनमाने। सबके सुख हे आने आने
शोभामोहन श्रीवास्तव
२६/०४/२०२१

यह दुनिया वह जंगल है।
जिसमे निशदिन दंगल है।।
मन अज्ञान अंधेरा है।
जन्म मरन जगफेरा है।।
फिसल रहा बस पल पल है।
यह दुनिया वह जंगल है।।
सृष्टि स्वरूप निराली है।
सम्मोहक रस प्याली है।।
कुसुमित कली भ्रमरदल है।
यह दुनिया वह जंगल है।।
रात सपन की ढेरी है।
दिन अरुझी झरबेरी है।।
सुख के माथे पर बल है।
यह दुनिया वह जंगल है।।
दो दिन की जिनगानी है।
जिसमे खींचातानी है।।
पग पग अनगिन ठगदल हैं।
यह दुनिया वह जंगल है।।
जग से सुख की आशा है।
पड़ा उलट पर पासा है।।
अंतर सुखनद कलकल है।
यह दुनिया वह जंगल है।।
शोभामोहन
मैं कौन हूँ मैं कौन हूँ
न मै नाम हूँ न मैं रूप हूँ।
न मैं बुद्धि हूँ न स्वरूप हूंँ।।
न मै अस्थि मज्जा देह हूँ।
न मैं जीव रक्षक गेह हूँ।।
न मैं मन का विस्तृत जाल हूँ।
न मैं भुवन हूँ न भुआल औं।।
न मैं जड़ जगत का तत्व हूँ।
न मैं रज न तो तम सत्व हूँ।।
न मैं मूर्ख हूँ न सुजान हूँ ।
न मैं बाल बृद्ध जवान हूँ।।
न मैं इन्द्रियों का भोग हूँ।
न मैं जनक जननी योग हूँ ।।
मैं कौन हूँ मैं कौन हूँ
शोभामोहन
१४/०१/२२
रायपुर
*भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है*
अपनों को पहचानने में अब, नहीं कोई कठिनाई है।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
रंग बसंती देश रंगा औ, मचल रही तरुणाई है।
विधर्मियों के सर्वनाश को, तलवारें लहराई है।।
अपनों को पहचानने में अब, नहीं कोई कठिनाई है।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
देश धर्म की रक्षा करने, अपनी बारी आई है।
सौ करोड़ हम हिन्दुस्तानी, ने सौगंध उठाई है।।
अपनों को पहचानने में अब, नहीं कोई कठिनाई है।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
छल प्रपंच की राजनीति ने, विकट परिस्थिति लाई है।
कट्टर विषबेलों को कुचलने, करनी हमें लड़ाई है।
अपनों को पहचानने में अब, नहीं कोई कठिनाई है।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
मुगल लुटेरों से लड़ते, पुरखों ने उमर गँवाई है।
शत् शत् उनका वंदन करने, अब तो शुभ घड़ी आई है।।
अपनों को पहचानने में अब, नहीं कोई कठिनाई है।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
अभी नहीं तो कभी नहीं बस, अंतिम यही लड़ाई है।
योद्धाओं हथियार संभालो, विधि ने बिगुल बजाई है।।
अपनों को पहचानने में अब, नहीं कोई कठिनाई है।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
जात पात के रोग भुलाओ, हिन्दू तभी भलाई है।
गला काटने घात लगाये, बैठे निठुर कसाई हैं।।
अपनों को पहचानने में अब, नहीं कोई कठिनाई है।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
बहू बेटियों की इज्जत और, प्राण पे जब बन आई है।
हो जाओ अब आगबबूला, गहरी विपदा छाई है।।
अपनों को पहचानने में अब, नहीं कोई कठिनाई है।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
घर दुकान को चिन्हित कर कर, जिसने आग लगाई है।
फिर उससे क्या भाईचारा, फिर वह कैसे भाई है।।
अपनों को पहचानने में अब, नहीं कोई कठिनाई है।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
शोभामोहन
१४/०१/२०२२
रायपुर
जागो रे मेरे प्यारे, माँ भारती के लाल
जागो रे मेरे प्यारे, माँ भारती के लाल।
आराध्य तुम्हारे शंभु विष्णु।
जग में तुम हो सबसे सहिष्णु।
लेकिन तुम अब बन राम कृष्णु।।
जागो रे मेरे प्यारे, माँ भारती के लाल।
अब फुफकारो बन शेषनाग।
वक्षस्थल में धधकाओ आग।
धोने कलंक के कठिन दाग।।
जागो रे मेरे प्यारे, माँ भारती के लाल।
जागा है पुण्यों का प्रताप।
अवसर आया चल द्वार आप।
सुन युग परिवर्तन कदम चाप।
जागो रे मेरे प्यारे, माँ भारती के लाल।
सुन सिसकी पावन गंग धार।
खंडित हिमगिरियों की पुकार।
माँ का आँचल जब तार तार।
जागो रे मेरे प्यारे, माँ भारती के लाल।
तुम महाकाल के रूप धार।
पशुवृत्ति का करने संहार।
करने कुठार से कठिन वार।
जागो रे मेरे प्यारे, माँ भारती के लाल।
शोभामोहन
पाटन
०१/०१/२०२२
सेंदुरदान गीत।
चुटकी भर सेंदूर के मोल गजब दाई,
छूटत जन्म धरे ठाँव ओ दाई मोर२।
झलमल चुंदरी के मोल गजब दाई,
छूटत हे अँचरा के छाँव ओ दाई मोर२।।
एड़ी के माहुर के मोल गजब दाई,
छूटत हावै मोर गोत ओ दाई मोर२।
बाँही भर चूरी के मोल गजब दाई,
बेटी ठाढ़े अँगना मा रोत ओदाई मोर२।।
शोभामोहन
१९/०२/२०२२
महुदा

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संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...