Thursday, 16 March 2023

शक्ति छन्द

 

*शक्ति छन्द*

(११२) या (२१२) या (१११)

ललाला ललाला ललाला लला ।

भले लाख कोनो ह चतुरा हरय।

इहाँ जेन जइसे करै वो भरय ।

बरै वो बुतावै फरै वो झरय ।

बिधाता लिखै वो न टारे टरय ।।

तपै ते खपै अउ सहै ते लहय ।

सबो बात ठउका सियाने कहय ।।

सबो ज्ञान जेने ह पावै धरय

नवै सीख जीयै मया हिय झरय ।।

शोभामोहन

शक्ति छंद

122 122 122 12

ललाला ललाला ललाला लला

-----------------------------------------

*महामंत्र झनका मँझारी भुवन*

---------------------------------------

१/

सबो दु:ख-बिपदा ल टारौ सजन,

मया भाव अंतस पझारौ सजन ।

जगत के डहर ले निवारौ सजन,

महामंत्र झनका मँझारी भुवन ।।

2/

घुँचा देह ले प्रान पारस छुवन,

महा भवभँवर ले उबारौ सजन ।

भरौ भाव अंतस सिंगारौं सजन,

महामंत्र झनका मँझारी भुवन ।।

३/

अगुन मा सगुन ला पधारौ अजम,

सबो काज अरझे सँवारौ अगम ।

बुतावौ न अनगिन जनम के अगन,

महामंत्र झनका मँझारी भुवन ।।

शोभामोहन

 

सुवारी के सँइया अगोरा *शक्ति छन्द*

खबर हे मिले आज आही पिया,

गजब जोर से आज धडकत जिया।

कतिक दिन म आवत हे परदेसिया,

करे हौं तियारी ल अब्बड़ गिंया ।।

पहट ले सगुन हे जनावत जबर,

फरकत हवै नैन डेरी डहर ।।

खबर हे मिले आज आही पिया,

गजब जोर से आज धडकत जिया।

चना दार बेसन पिसाये हवौं,

छुही लीपके खूँटियाये हवौं।

बहारे लिपे हौं चुटुक कुरिया,

खबर हे मिले आज आही पिया।।

चुरेना ल काँचेव भाजी सिल्हो,

निकाले हवौं घी दही ला बिलो ।।

चढ़ायेंव अँधना ल आगी जिया,

खबर हे मिले आज आही पिया।।

सजायेव घर चँउक चाँदन बना,

उवाटौं दुआरी मया मा सना ।

रखै हौं सजा के नयन के दिया ।।

खबर हे मिले आज आही पिया ।।

शोभामोहन

०२/०७/२०२१

इहाँ जेन जइसे करै वो भरे (शक्तिछंद)

इहाँ जेन जइसे करै वो भरै ।

भले लाख मनुसान चतुरा हरै।

बरै वो बुतावै फरै वो झरै ।

बिधाता लिखे ते न टारे डरै ।।

तपै ते खपै अउ सहै ते लहै ।

सबो बात ठउका सियाने कहै ।।

सबो ज्ञान जेने ह पावै धरै

नवै सीख जीयै मया रस झरै ।।

गुने हा गँवावै लिखे हा छपै ।

महानंद भागी निरंतर जपै ।।

इहाँ जेन जइसे करै वो भरै ।

न छोटे घिनावै न घेपै बड़े ।

धरै टेक तेने म टेके अड़े ।।

जिहाँ जाय अपमान भोगे परै।

इहाँ जेन जइसे करै वो भरै ।

सबो भाल लिखवाय भोगे धरै।।

बढ़ै ते घटै अउ मिटै वो बनै ।।

गिरै ते उठै अउ उवै वो ढरै।

इहाँ जेन जइसे करै वो भरै ।

शोभामोहन

०१/११/२०२०

 

 

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...