Thursday, 16 March 2023

छंद----सोरठा

 

करत जबर बढ़वार,जनकवि के कुल कीर्ति में ।
छंद सिखावनहार,अरुण निगम गुरुवर हमर ।।

छंद----सोरठा

मनखे मन सकलाय,चारी में सुख पात हे ।

भजन म कहू बलाय,बेरा नहीं बतात हे ।।

करत जबर बढ़वार,जनकवि के कुल कीर्ति में ।

छंद सिखावनहार,अरुण निगम गुरुवर हमर ।।

जइसे करय शिकार, घात लगा के बाघ हर।

डउल लगा करतार,लक्ष्य तहूँ हर नेत के।।

सतगुरु हर जनवाय, सिरतो जम्मो बात ला।

सबले बड़े कहाय,तेकर सेती जगत मा ।।

कभू न होय अधीर, धीर धरय नारी सदा।

हँसत बदन गंभीर , बूता के चितखान मा ।।

शोभामोहन

 

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