Thursday, 16 March 2023

शशिवदनाछंद ।।। ।ऽऽ

 

नारी सिंगार (शशिवदनाछंद ।।। ।ऽऽ)

पहिरत मोती ।

बगरत जोती।।

जुगजुग माला।।

करत उजाला।।

लकलक टीका ।

ठउर सटीका।।

लटकत बेनी ।

लगत त्रिबेनी।।

करधन सोहे ।

जग मन मोहे।।

छुमछुम साँटी ।

उपकत घाँठी।।

लटकन बाली ।

सज मतवाली।।

हरियर सारी।

पहिर कुँवारी।

कर बड़ स्वाँगा।

अउ धर बाँगा।।

जल भर लाये।

मटकत जाये।।

सतरँग बोली।

करत ठिठोली ।।

मन हरसाथे ।

अउ तरसाथे।।

शोभामोहन श्रीवास्तव

१६/०४/२०२१

 

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