Wednesday, 15 March 2023

गगनांगना छंद

 

लाला लाला लाला लाला, लालल लालला ।

विधान – 25 मात्रा, 16,9 पर यति, चरणान्त में 212 दो-दो चरण तुकांत l

छोड़ सबो सुख राजमहलिया, जावत राम हे ।

नर चोला धरके दुख गलिया, जावत राम हे।।

तारन पथरा बने अहिलिया, जावत राम हे ।

बाँटे पिरित दया उदलिया, जावत राम हे।।

मात पिता गुरु बचन निभाये, जावत राम हे ।

ऋखि मुनिदल के जीव बचाये, जावत राम हे।।

पुन फल बाँटे सुख बगराये, जावत राम हे ।

नेम धरम ला थाप मढ़ाये, जावत राम हे ।।

शोभामोहन हर सुख पाये, गावत राम हे ।

मगन अपन धुन में बइहाये, गावत राम हे।।

बेरा घेरा छोड़ उड़ाये, गावत राम हे ।

नाम लहरगंगा लहराये, गावत राम हे ।।

शोभामोहन श्रीवास्तव

२४/०८/२०२०

खुश्बूविहार कालोनी अमलेश्वर

रायपुर

गगनांगना छंद [सम मात्रिक]

विधान – 16,9 पर यति अंत 212

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मनवा गाले लगन लगाले,

सीता राम के ।

जगत चराचर के रखवाले,

सीता राम के ।

पाप रूखवा फर झर्रइया,

राजा राम के।

ताप मिटैया जीव जुड़ैया,

सीता राम के ।।

मनवा गाले अलख जगाले,

राजाराम के ।।

मनवा गाले अलख जगाले,

सीताराम के ।।

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शोभामोहन

 

(13) गगनांगना छंद (सम मात्रिक)

लाला लाला लाला लाला, लालल लालला

राखत पोंसत जीव ल तोसत,  आखिर कोन हे ।

काया जन्तर प्रान खमोसत, आखिर कोन हे ।।

बने गीनहा देखत कोचत, आखिर कोन हे ।

बने करम कर ऊँचहा सोचत, आखिर कोन हे ।।

 

शोभामोहन

 

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