लाला लाला
लाला लाला, लालल लालला ।
विधान – 25 मात्रा, 16,9 पर यति, चरणान्त में 212 दो-दो चरण
तुकांत l
छोड़ सबो सुख
राजमहलिया, जावत राम हे ।
नर चोला धरके दुख
गलिया, जावत राम हे।।
तारन पथरा बने
अहिलिया, जावत राम हे ।
बाँटे पिरित
दया उदलिया, जावत राम हे।।
मात पिता गुरु
बचन निभाये, जावत राम हे ।
ऋखि मुनिदल के
जीव बचाये, जावत राम हे।।
पुन फल बाँटे
सुख बगराये, जावत राम हे ।
नेम धरम ला
थाप मढ़ाये, जावत राम हे ।।
शोभामोहन हर
सुख पाये, गावत राम हे ।
मगन अपन धुन
में बइहाये, गावत राम हे।।
बेरा घेरा छोड़
उड़ाये, गावत राम हे ।
नाम लहरगंगा
लहराये, गावत राम हे ।।
शोभामोहन
श्रीवास्तव
२४/०८/२०२०
खुश्बूविहार
कालोनी अमलेश्वर
रायपुर
गगनांगना छंद
[सम मात्रिक]
विधान – 16,9 पर यति अंत 212
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मनवा गाले लगन
लगाले,
सीता राम के ।
जगत चराचर के
रखवाले,
सीता राम के ।
पाप रूखवा फर
झर्रइया,
राजा राम के।
ताप मिटैया
जीव जुड़ैया,
सीता राम के
।।
मनवा गाले अलख
जगाले,
राजाराम के ।।
मनवा गाले अलख
जगाले,
सीताराम के ।।
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शोभामोहन
(13) गगनांगना छंद (सम मात्रिक)
लाला लाला
लाला लाला, लालल लालला
राखत पोंसत
जीव ल तोसत, आखिर कोन हे ।
काया जन्तर प्रान
खमोसत, आखिर कोन हे ।।
बने गीनहा
देखत कोचत, आखिर कोन हे ।
बने करम कर
ऊँचहा सोचत, आखिर कोन हे ।।
शोभामोहन
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