मोबाइल महिमा
मोबाइल मा होत
हे,आज जम्मो व्यवहार।
लाग-नता मन छूटगे, अनचिन्हार
लगवार।।
अनचिन्हार
लगवार, आय हे नवा जमाना।
कोनो
सग-सगियात, संग नइ आना-जाना ।।
बस कमेन्ट
लाईक, करइया उतरे दिल मा।
दिन भर ओंड़ा
देय, हवँय सब मोवाइल मा ।।
शोभामोहन
पाना पतझर मा
झरे
पाना पतझर मा
झरे,आवय तभे बहार ।
दुख पाछू सुख
हे लगे,लहुटे पहुटे बार ।।
लहुटे पहुटे
बार चलत नर ,लाख जतन कर ।
सुख के चक्कर,दुखद गली धर,कतको मर मर।
छोड़ गाँव घर,कहूँ मेर टर,नइ छोंड़य डर ।
बेरा हे खर,बोलत झरझर, पाना पतझर ।।
शोभामोहन
[01/08, 22:42]
ब्यारा पैरावट
रही (कुंडलिया)
ब्यारा पैरावट
रखौ,खाहीं बइला गाय ।
खेत म पैरा
लेसहू,तुँहला लगही हाय।।
तुँहला लगही
हाय,अरे जब भूख सताही।
पुट्ठा झिल्ली
खात,गली में जा छुछुवाही।।
भटकन झन दव
गाय,गाँव अउ गली शहर मा।
पैरा रचव सकेल,रखव पैरावट
ब्यारा ।।
शोभामोहन
[20/06, 17:38]
योग जेन करथे
सदा कभू न डाँटै रोग
तन फुरसुद
रहिथे बने,करथे जेने योग।
योग जेन करथे
सदा,कभू न डाँटय रोग।।
कभू न डाँटय रोग,बइद के घर नइ
जावय।
मन तक रहय
मलंग,नहीं दुख दोख सतावय।।
अँइठे अँइठे दिखत हे
अँइठे अँइठे दिखत हे,मेघ नेवता पाय।
हाथ जोर कलपत सबो,देख तभो नहीं आय।
देख तभो नहीं आय,उड़ावत जात बदरिया।
बिनती करत मनात,मूँड़ धर सबो नँगरिया।।
बिन बरसे हे जात,धपोरे सब झन बइठे।
फेर बोचकत आज,तीर ले अँइठे अँइठे।।
शोभामोहन
[22/06, 10:33]
गुरु ज इसन कोनो नही
गुरु जइसन कोनो नहीं,दिखय कहूँ संसार।
चेला के गलती बता,गुरुजन करँय सुधार।।
गुरुजन करँय सुधार,अपन लइका कस सेथें।
राख मूँड़ मा हाथ,अविद्या ला हर लेथें।।।
मया दया उपकार,सदा बरसाथें अइसन।
तेकर सेती होय,नहीं कोनो गुरु जइसन ।।
शोभामोहन
16/06/19
पहुना जब जब आय
पहुना जब जब डेहरी,अँगना गोड़ मड़ाय।
बहू मूँड़ ला ढ़ाक के,पानी लोटा लाय।।
पानी लोटा लाय,सगा के पाँव पखारे।
गुरतुर बोली बोल,राँध के खाय बिठारे ।।
ओकर कस मिलतार,बहू तो दिखे कहूँ ना ।
बहू ल सब झन भाय,आय घर जब जब पहुना।
शोभामोहन
12/06/19
ब्यारा पैरावट रही
ब्यारा पैरावट रखौ,खाहीं बइला गाय ।
खेत म पैरा लेसहू,तुँहला लगही हाय।।
तुँहला लगही हाय,अरे जब भूख सताही।
पुट्ठा झिल्ली खात,गली में जा छुछुवाही।।
भटकन झन दव गाय,गाँव अउ गली शहर मा।
पैरा रचव सकेल,रखव पैरावट ब्यारा ।।
शोभामोहन
[20/06, 17:38]
टकटक देखत मोहना
टकटक देखत मोहना,पलक नही झपकात।
राधारानी लाज मा,मूँड़ नवा मुस्कात।।
मूँड़ नवा मुस्कात,कनेखी देख सिहरगे।
हिरदे गंध लुटात,उदुपहा हाँसी झरगे।।।
बिँदिया दमकै माथ,बरत हे लकलक लकलक।
लाज म उपके रूप,मोहना देखत टकटक।।
शोभामोहन
12/06/19
छाय हे बादर करिया
करिया बादर देख के,माते हें मतवार।
गिंजरत हावँय देख तो,बाँही धर लगवार।।
बाँही धर लगवार, करत हें गिद्दमसानी ।
मया अबड़ बरसात,बोल के आनी बानी।।
संगी संग इतरात ,खेत मा गात ददरिया।
मन में मया गढ़ात,छाय ए बादर करिया।।
शोभामोहन
11/06/19
कब आबे परदेस ले
आबे कब परदेस ले,मोर सुखावत प्रान।
अउ नइ आबे चार दिन,जीव न बाँचय जान।।
जीव न बाँचय जान,भूख अउ नींद न लागे।
झूलत मुहरन तोर,नैन दुख बादर छागे।।
कब लेबे तँय सोर,मया के गीत सुनाबे।
आँखी हर पथरात,लहुट के तँय कब आबे।।
शोभामोहन
11/06/19
नेवते हे फुलवारी
डारा पाना फूल हा,पवन संग लहरात।
लूट लूट मकरंद ला,भँवरा मजा उड़ात।।
भँवरा मजा उड़ात,नेवते हे फुलवारी।
डुँहड़ू सबो लुकाय,अबड़ देवत हें गारी।।
चुहके झोर अघाय,मया के कहाँ उतारा।
गिंजरत हे भकवाय,देख के हाँसत डारा।।
●कुण्डलिया
करिया बादर
देख के,माते हें मतवार।
गिंजरत हावँय
देख तो,बाँही धर लगवार।।
बाँही धर
लगवार, करत हें गिद्दमसानी ।
मया ल अपन जतात,बोल के आनी
बानी।।
संगी संग
इतरात ,खेत मा गात ददरिया।
मन में मया
गढ़ात,छाय ए बादर करिया।।
● कुण्डलिया (राधा कृष्ण )
टकटक देखत
मोहना,पलक नही झपकात।
राधारानी लाज
मा,मूँड़ नवा
मुस्कात।।
मूँड़ नवा
मुस्कात,कनेखी देख सिहरगे।
हिरदे गंध
लुटात,उदुपहा हाँसी झरगे।।।
बिँदिया दमकत
माथ,बरत हे लकलक लकलक।
लाज म उपके
रूप,किशन हर देखत टकटक।।
●कुण्डलिया(बहू)
घर डेरउरी जब
कभू,पहुना गोड़ मड़ाय।
बहू मूँड़ ला
ढ़ाक के,पानी लोटा लाय।।
पानी लोटा लाय,सगा के पाँव
पखारे।
गुरतुर बोली
बोल,राँध के खाय बिठारे।।
हाँसत बूता
काम,करे सब झरफर झरफर।
बहू ल हूँत
कराय,सगा जब जब आवय घर ।।
शोभामोहन
●पारा चढ़गे कुण्डलिया
पारा चढ़गे जेठ
के,भड़कत सूरुज
देव।
सेंकत सब्बो
जीव ला,जीव लुकावत छेंव।।
जीव लुकावत
छेंव,गिरत हे आगी गोला।
छाँव ठाँव मा देख, जरत हे चट चट
चोला।।
टरटर ले ए घाम,जीव दुख देत
अजारा।
सब झन मूँह
लुकात,नँगत हे चढ़गे पारा।।
शोभामोहन
●कुण्डलिया राधिका के चालढ़ाल
बड़ेफजर ले
राधिका,पानी ओखी जाय।
जमुना जी के
घाट मा,कान्हा हवय बलाय।।
कान्हा हवय
बलाय,चलत हे राधा रानी।
ठिठकत ठमकत
खोर,डहर हे जात सयानी।।
मन मा हे
डर्रात,लुकाके निकलत घर ले।
बाजत नइ हे
गोड़,जात हे बड़ेफजर ले।।
●कुण्डलिया (गुरु)
गुरु जइसन
कोनो नहीं,दिखय कहूँ संसार।
चेला के गलती
बता,गुरुजन करँय सुधार।।
गुरुजन करँय
सुधार,अपन लइका कस सेथें।
राख मूँड़ मा हाथ,अविद्या ला हर
लेथें।।।
मया दया उपकार,सदा बरसाथें
अइसन।
तेकर सेती होय,नहीं कोनो
गुरु जइसन ।।
शोभामोहन
●पैरावट कुण्डलिया
घर मा पैरावट
रही,खाहीं बइला गाय ।
खेत म पैरा
लेसहू,तुँहला लगही हाय।।
तुँहला लगही
हाय,अरे जब भूख सताही।
पुट्ठा झिल्ली
खात,गली में जा छुछुवाही।।
भटकन झन दव
गाय,गाँव अउ गली शहर मा।
पैरा रचव सकेल,रखव पैरावट घर
मा ।।
शोभामोहन
●बिलमे बादर (कुण्डलिया)
करिया बादर
छाय हे,जागत हावय आस।
बाट निहारत
रातदिन,धरती मरत पियास।।
धरती मरत
पियास,मया के भेजे पतिया।
पवन फिरन्ता ताय,भूलगे का
बहमतिया।।
आस लगाये बाट,निहारत दसा
अँचरिया।
कोन हवय
बिलमाय,आय नइ बादर करिया।।
●मेघराज कुण्डलिया
अँइठे अँइठे
दिखत हे,मेघ नेवता पाय।
हाथ जोर कलपत
सबो,देख तभो नहीं आय।
देख तभो नहीं
आय,उड़ावत जात
बदरिया।
बिनती करत
मनात,मूँड़ धर सबो नँगरिया।।
बिन बरसे हे
जात,धपोरे सब झन बइठे।
फेर बोचकत आज,तीर ले अँइठे
अँइठे।।
शोभामोहन
●कुण्डलिया ( योग)
तन फुरसुद रहिथे
बने,करथे जेने योग।
योग जेन करथे
सदा,कभू न डाँटय रोग।।
कभू न डाँटय
रोग,बइद के घर नइ जावय।
मन तक रहय मलंग,नहीं दुख दोख
सतावय।।
सुघर अवरदा
संग,बढ़ावय सुख धन साधन ।
अंतस रहे
निरोग,सदा दिन अउ फुरसुद तन।।
शोभामोहन
●बँधना छोर (कुण्डलिया)●
जगत रचे करतार,तत्व ला
पाँचों जोरे ।
जीव ह सबो
बँधाय,सकय नइ बँधना छोरे।।।
कारज जतका होय,कसय बाँधय बड़
भारी।।
भज गत अपन
सुधार,कहत प्रभु बन संगवारी।।
गीता पढ़के जान ले,कइसे जीना तेन
ला।
कृष्ण बताये
पार्थ ला,कुरुक्षेत्र मा जेन ला।।
शोभामोहन
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पहुना जब जब
आय (कुण्डलिया)
घर डेरउरी जब
कभू,पहुना गोड़ मड़ाय।
बहू मूँड़ ला
ढ़ाक के,पानी लोटा लाय।।
पानी लोटा लाय,सगा के पाँव
पखारे।
गुरतुर बोली
बोल,राँध के खाय बिठारे।।
हाँसत बूता
काम,करे सब झरफर झरफर।
बहू ल हूँत
कराय,सगा जब जब आवय घर ।।
शोभामोहन
13/06/19
नेवते हे
फुलवारी (कुण्डलिया)
डारा पाना फूल
हा,पवन संग लहरात।
लूट लूट मकरंद
ला,भँवरा मजा उड़ात।।
भँवरा मजा
उड़ात,नेवते हे फुलवारी।
डुँहड़ू सबो
लुकाय,अबड़ देवत हें गारी।।
चुहके झोर
अघाय,मया के कहाँ उतारा।
गिंजरत हे
भकवाय,देख के हाँसत डारा।।
टकटक देखत
मोहना (कुण्डलिया)
टकटक देखत
मोहना,पलक नही झपकात।
राधारानी लाज
मा,मूँड़ नवा मुस्कात।।
मूँड़ नवा
मुस्कात,कनेखी देख सिहरगे।
हिरदे गंध
लुटात,उदुपहा हाँसी झरगे।।।
बिँदिया दमकै
माथ,बरत हे लकलक लकलक।
लाज म उपके
रूप,मोहना देखत टकटक।।
शोभामोहन
12/06/19
छाय हे बादर
करिया (कुण्डलिया)
करिया बादर
देख के,माते हें मतवार।
गिंजरत हावँय
देख तो,बाँही धर लगवार।।
बाँही धर
लगवार, करत हें गिद्दमसानी ।
मया अबड़ बरसात,बोल के आनी
बानी।।
संगी संग
इतरात ,खेत मा गात ददरिया।
मन में मया
गढ़ात,छाय ए बादर करिया।।
शोभामोहन
11/06/19
कब आबे परदेस
ले (कुण्डलिया)
आबे कब परदेस
ले,मोर सुखावत प्रान।
अउ नइ आबे चार
दिन,जीव न बाँचय जान।।
जीव न बाँचय जान,भूख अउ नींद न
लागे।
झूलत मुहरन तोर,नैन दुख बादर
छागे।।
कब लेबे तँय
सोर,मया के गीत सुनाबे।
आँखी हर पथरात,लहुट के तँय
कब आबे।।
शोभामोहन
11/06/19
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