Thursday, 2 March 2023

छत्तीसगढ़ी दोहा


 छत्तीसगढ़ी दोहा 

पाँच जिनिस के कुन्दरा, सुगना तोर बसेर।
पाप पुण्य जाने बिगन, लाहो लेथस फेर।।


दू दिन के बरसात में, टोरत हस तैं पार।
का सिखही जग तोर ले, नदिया चिटिक बिचार।।  

सरवर में हंसा बुड़े, बुड़े समुन्दर सीप। 
गुहलेदा माछी बुड़े, संसो बुड़े महीप।। 

उड़ उड़ के पंछी थकै, कुकरी भुँइया कोड़।
आशा तिसना नइ थकै, थकै जीव हरि छोड़ ।। 

मोती ला हंसा चरै, चरै गाय हर घाँस। 
लालच बुद्धि ला चरै, मन ला संसो फाँस।।

चूल्हा में आगी बरै, बरै देह में रीस।
चेत चढ़त आँखी बरै, तभे मिलै जगदीश।। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव 
रायपुर छत्तीसगढ़ 
मों 9171096309 

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