Thursday, 2 March 2023

करत प्रभु चराचर विचरन हे। (प्रहरणकलिका वर्णिकछंद)

करत प्रभु चराचर विचरन हे। 
(प्रहरणकलिका वर्णिकछंद) 

लललल ललला लललल ललला 

करत प्रभु चराचर विचरन हे।
सकल जगत वोकर सिरजन हे।।
भजत जगत छोरत घुमरन हे।
सुखरुख छँइहा जुड़ बड़घन हे।। 

सुनत गुनत जे मगन मुदित हे। 
उहि तन सँउहें सुरुज उदित हे।। 
भसकत भितिया सजनमिलन हे।
करत प्रभु चराचर विचरन हे। 

सुख अवसर सग लगत जगत हे।
घन एकसरवा दुख दहकत हे।।
धन जन बिरथा तिरिनअसन हे। 
करत प्रभु चराचर विचरन हे। 

जगर मगर रेंगत सतपत हे।
सुधरत जग में उनकर गत हे।। 
लपटत जग वो परत मरन हे। 
करत प्रभु चराचर विचरन हे।

अठल मठल हो झन मन बइहा। 
भवजल दहरा गलियन कइहा।।
सत अउ सिरतो सजन भजन हे। 
करत प्रभु चराचर विचरन हे।। 

शोभामोहन श्रीवास्तव 
११/०२/२०२३

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