होष मिले नहीं हाट
हाॅं री होष मिले नहीं हाट
हाॅं री होष मिले नहीं हाट
बेहोषी की बहुत दुकाने, भय तिरकर बनती मुस्काने
तन करें कांकर काठ,
हाॅं री होष मिले नहीं हाट
होष नहीं उसे होष नहीं हैं, जागा वह खामोष नहीं है,
चलत बता रहा बाट
हाॅं री होष मिले नहीं हाट,
जोगी खोजे मन बीच जाके, तन का ढ़ेला खांख बनाके
कर मन जगत उचाट
हाॅं री होष मिले नहीं हाट
षुभचन्द्रसूर्या षोभामोहन
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