Sunday, 12 February 2023

होश मिले नहीं हाट

 

होष मिले नहीं हाट

 

हाॅं री होष मिले नहीं हाट

हाॅं री होष मिले नहीं हाट

बेहोषी की बहुत दुकाने, भय तिरकर बनती मुस्काने

तन करें कांकर काठ,

हाॅं री होष मिले नहीं हाट

होष नहीं उसे होष नहीं हैं, जागा वह खामोष नहीं है,

चलत बता रहा  बाट

हाॅं री होष मिले नहीं हाट,

जोगी खोजे मन बीच जाके, तन का ढ़ेला खांख बनाके

कर मन जगत उचाट

हाॅं री होष मिले नहीं हाट

 

षुभचन्द्रसूर्या षोभामोहन

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