लफ्जो के आगे की दुनिया
बयाॅं का हक है पर कहने की क्या जरूरत है
लफ्जो के आगे दुनिया और खूबसूरत है
खुमार में डूबे आॅंखो के इषारे का क्या नाम है
मगर ये तो लफ्जों से कहीं जादा बदनाम हैं
तमाम मिलन की बेला का आॅंखों में महूरत है
लफ्जों के आगें,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मन में मुरलिया की तान , गूॅंज देंह आॅंगन
ढेले में मिल जाता खो जाता है कण-कण में
हिरनी सी आॅंखे है जोगन सी सूरत है
लफ्जों के आगे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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