Saturday, 11 February 2023

लफ्जो के आगे की दुनिया

 

लफ्जो के आगे की दुनिया

 

बयाॅं का हक है पर कहने की क्या जरूरत है

लफ्जो के आगे दुनिया और खूबसूरत है

 

खुमार में डूबे आॅंखो के इषारे का क्या नाम है

मगर ये तो लफ्जों से कहीं जादा बदनाम हैं

तमाम मिलन की बेला का आॅंखों में महूरत है

लफ्जों के आगें,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 

मन में मुरलिया की तान , गूॅंज देंह आॅंगन

ढेले में मिल जाता खो जाता है कण-कण में

हिरनी सी आॅंखे है जोगन सी सूरत है

लफ्जों के आगे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 

 

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