मोर बिन अँधियार हे जग (रूपमाला छंद)
२१२२ २१२२, २१२२ २१
(१)
बाँहबल सबला सिरजथौं, मैं न मानँव हार ।
मोर बिन अँधियार हे जग, मैं हरौं बनिहार ।।
गाँव कस्बा अउ शहर मा, मोर मिहनत सार ।
गौंटिया सब सेठ दाऊ, मोर करजादार ।
(२)
बीन काँटा खेत जोतौं, घाम मा अइलाँव ।
पेट भर सब ला खवाके, लाँघने सुत जाँव।।
मोर मिहनत ले चलत हे, जान लौ संसार ।
मोर बिन अँधियार हे जग, मैं हरौं बनिहार ।।
(३)
मैं कछोरा भिर कमाके, साँझकुन घर आँव ।
उठ पहट दिनभर खँटौं मैं, नइ चिटिक सुस्ताँव ।।
देख लौ सुख मा नहीं हे, मोर कुछु अधिकार।
मोर बिन अँधियार हे जग, मैं हरौं बनिहार ।।
(४)
मोर सिरजाये महल मा, भोगथौ सुख भोग।
मोर कुरिया देख छितका, कब मरे हौ सोग।।
कारखाना मा गिराथौं, मैं पसीना धार ।
मोर बिन अँधियार हे जग, मैं हरौं बनिहार ।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छ.ग.
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