Tuesday, 21 July 2020

अभी दिया मा तेल बचे हे ।
असल नकल के खेल बचे हे।।
भितिया भारा ला भसका के,
अभी होय बर मेल बचे हे ।
जेन नशा के नही उतारा,
चढ़े उही जबरेल बचे हे ।
सबले बजनी बाज डरे हँव,
बाँधे मने दंँतेल बचे हे ।।
बेरा डँगनी अकन हवै अब
जग के नंँगते झेल बचे हे ।
शोभामोहन श्रीवास्तव
३०/०५/२०२०
खुश्बू विहार कालोनी

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