Tuesday, 21 July 2020

देख के जग के तमाशा हँव गजब हैरान रे
1/
भूलके मैं एक रतिहा,कोन अँव का नाम हे
जान डारे हँव जगत मा,मोर कतका दाम हे।
देख उघरा सच ल संगी ,काँप गे हे प्रान रे
देखके जग के तमाशा, हौं गजब हैरान रे।।
2/
घाट मा शमशान दिखथे,एक राजा कंगला
हे परे ओकर कमाये ,कार मोटर बंगला ।
जीव भर जावत असंगी,देख लागिस बान रे
देखके जग के तमाशा, हौं गजब हैरान रे।।
3/
सोन चाँदी ला सजाये,जे रतन मोती जड़े
देख ले हँव मोल ओकर, घाट मा होके खड़े ।
देख नत्ता मन उखलगे,ये रमइया प्रान रे
देखके जग के तमाशा, हौं गजब हैरान रे।।
4/
राख के कुड़ही बनत हें,बीर जगजीता घलो
पाय कोनो सुख नहीं हे ,मोह अउ माया मलो ।
हे लबारी गाँव ये अउ,जग लबारी जान रे
देखके जग के तमाशा, हौं गजब हैरान रे।।
5/
जे हवा के संग बोलै, आज अउँधे हे परे
गौंटिया कोनो बड़े हे,अउ कहूँ दाऊ हरे।
जेन कोनो ला गुनय नइ, भूलगे अँटियान रे
देखके जग के तमाशा, हौं गजब हैरान रे।।
6/
जेन फूले नइ समावै,रूप के अभिमान मा
डरडरावन वो दिखत हे, जब परे शमशान मा।
जीव जावत साठ देखव, निकलगे सब शान रे
देखके जग के तमाशा, हों गजब हैरान रे।।
शोभामोहन
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