सुन्ना घर पहुना झन बन
उजरा दे माटी के मुहरन।
गोड़ गड़े काँटा झन गन।।
सुन्ना घर पहुना झन बन।
झन अँजोर ले रख अनबन।
बेरा ले झन धर झगरन।।
सुन्ना घर पहुना झन बन।
सुन्ना घर पहुना झन बन।
भिनसरहा ले कर सुमरन।।
सुन्ना घर पहुना झन बन
छोड़ सबो गिंजरन घुमरन।
बेरा ले झन धर झगरन ।।
सुन्ना घर पहुना झन बन
शोभामोहन
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