स्वर तिरोहित मुग्ध है मन
स्वर तिरोहित मुग्ध है मन।
कामनाएंँ ऊष्ण बन ठन ।।
पाँव घुँघरू छनन छन छन ,
ओंठ छाया मदिर कंपन।
स्वाँस झरते फूल बन-बन,
उँगलियाँ पकड़े लड़कपन ।।
स्वर तिरोहित मुग्ध है मन ।।
कर रही है खनन खन खन,
चुलबुली चूड़ी व कंगन ।
मनमहल उत्सव विलय प्रण,
वासनाओ का अमरपन ।।
स्वर तिरोहित मुग्ध है मन।
घन करे घन घनन घन घन
बिजुरी करती गगन नर्तन
करे कंपित जब मृदुल मन
घिसते हम उमर चंदन ।।
स्वर तिरोहित मुग्ध है मन।
पवन चलता सनन सन-सन,
सुगंधित पाकर निमंत्रण ।
स्वप्न पालित चरण यौवन,
नाम गाये सजन धड़कन ।।
स्वर तिरोहित मुग्ध है मन।
शोभामोहन
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