Wednesday, 22 July 2020

16/16
कोरा गंगा-जमुना लहरा
रतन भरे भंड़ारी दहरा ।
हिमडोंगर मन देवत पहरा ।
दमकत माथा चमकत चेहरा।
होन न देवन तोला खंड़िया ।
रहिबे तीनो काल अखंडिया ।
जीव देवइया हें बलिदानी ।
सब बियाय तोर बचकानी।।
गुरु गहीर बुध आनी बानी
तपसी साधू ऋषि मुनि ज्ञानी।।
ल इका जम्मो तोर पहरिया ।।
00000000000000000000000

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...