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कोरा गंगा-जमुना लहरा
रतन भरे भंड़ारी दहरा ।
हिमडोंगर मन देवत पहरा ।
दमकत माथा चमकत चेहरा।
होन न देवन तोला खंड़िया ।
रहिबे तीनो काल अखंडिया ।
जीव देवइया हें बलिदानी ।
सब बियाय तोर बचकानी।।
गुरु गहीर बुध आनी बानी
तपसी साधू ऋषि मुनि ज्ञानी।।
ल इका जम्मो तोर पहरिया ।।
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