सदग्रंथ गुन बखान सवैया
सब बेद बखान करै उँकरे,
सब शास्त्र उही ल सिधोवत हे ।
सद्ग्रन्थ उहीच अधार बना,
मनके करियापन धोवत हे ।
धर अंतस मा गुन गोठ सबो,
गँठियात उही चक होवत हे ।
अड़हा मनखे अनजान बने,
अँधियार परे अउ रोवत हे ।
शोभामोहन
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