अनुमानों से बहुत बड़ा दिन
अनुमानो से बहुत बड़ा दिन,
अनुभव से है रात बड़ी ।
अवसादो के कथानको से,
उम्मीदों के पाँव डरे ।
आहत मन कागज पर रख के
दिन कर लेते हरे भरे ।।
चलो स्वयं की तरफ आ गये,
यही लगे अब बात बड़ी ।।
अनुमानो से बहुत बड़ा दिन,
अनुभव से है रात बड़ी ..............(1)
बने बटोही बिन मर्जी के,
निश्चित सुख दुख पाये है।
रंग बिरंगी सीपी मोती,
आँसू स्वयं सजाये हैं ।
व्यर्थं लगे अब तो कुछ कहना,
मरहम या आघात बड़ी ।
अनुमानो से बहुत बड़ा दिन,
अनुभव से है रात बड़ी ।................(2)
निजता का अस्तित्व भूलकर,
भटके लहर किनारों में ।
बहे विवश जीवन सरिता के,
तीव्र प्रवाहित धारा में ।।
जगत भँवर बाहर जाने की,
छोटी सी शूरुआत बड़ी ।
अनुभव से है बहुत बड़ा दिन,
उम्मीदों से रात बड़ी ।।....................(3)
शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर
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