जय जय नंदलला
जय-जय नटवर-नागर, करुणाकर हे।
यसुमति के प्रिय प्रान, जय-जय नंदलला।।
पिंयर-पिंयर ढ़िक-हरियर, पीताम्बर हे।
लर-लर गर-भर हार, जय-जय नंदलला।।
सहस-सुरुज कस चमकत, छबि दमकत हे,
जीवजगत रखवार, जय-जय नंदलला।।
जझरंग भसरंग मनरंग, दह कूदत हे,
सखिन सखा चिचियात, कहि जय नंदलला।
देखिन छेंकिन नागिन, कउवा गिन हे,
कहिन सुन लौ सुकुमार, जय-जय नंदलला ।
लड़-भिड़ फन चढ़ बिखहर, कर दिस थर हे।
नागिन कर जोर मनात, जय-जय नंदलला ।।
फन चढ़ नाथत बिखहर, मुरलीधर हे,
देवतन फूल बरसात, जय जय नंदलला।।
अकबक-सकपक-ब्रजजन, सब अपलक हे,
करमन देखि डरात, कहि जय-जय नंदलला।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
Sunday, 18 January 2026
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संस्कृत राम स्तुति
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