Sunday, 2 June 2024

आखरपौंदर फूल दसै उहि में चलथे सब भावकुँवारी।

आखर महिमा) मत्तगयंद सवैया


आखरपौंदर फूल दसै उहि में चलथे सब भावकुँवारी।

भावअनंग सलंग-बलंग फलंग-फलंग उठाय सवारी।।

मस्त मलंग महानउतंग करै मन चंग बिया सुख सारी।

आखर के बल देवल सेवल केवल ये जगती फुलवारी।।

आखर मेलमिलाप अलाप बिलाप कलापक्रिया करतारी।

आखर नाथत भाव बलात् हलात चलात सुबाट सोझानी।

आखर में सरधा रखिके सिरजे सब वेद मुनि बिगियानी।।

आखरजाप जपे जपनीधर वो सुख भोग करै मनमानी।

आखरहार बना पहिनावत भक्तहिया प्रभु ला मन बानी।।


No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...