Wednesday, 8 May 2024

बैरी अउ गद्दार मन पट पट ले मर जाय

बैरी अउ गद्दार मन पट पट ले मर जाय


मैं चाहत हँव ए दरी, नेता जब घर आय।

मोल लगावय वोट के, तुरते दिहौ भगाय।।

मैं चाहत हँव गाँव भर, घर-घर सुमता होय।

सुख संपत हो शांति हो, दुख दुरमत झन होय।।

मै चाहत हँव देश में,चुने जाय गुनवान।।

लालच देवय तेन ला, खेदौ कुकुर समान।।

मैं चाहत हौं देश में, वो दिन झटकुन आय।

बैरी अउ गद्दार मन, पटपट ले मर जाय ।।

शोभामोहन

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