बोट लिये बर नोट ला, बाँटै नेता लोग ।।
दारू कुकरी बाँट के, जीतै जेन चुनाव।
देश राज ला लूट उन, मेछा देवैं ताव।।
अउ झन उपजै केजरी, अउ झन अन्ना आय।
भ्रष्टाचारी चोरहा, सबके नाव बुताय।।
लबरा भठहा चोरहा, बदगे हवैं मितान।
बोट डारहू सोच के, तब होही कल्यान।।
कोरी खरिखा चोरहा, भ्रष्ट देश गद्दार ।
एक मंच में हें खड़े, कर लौ बने चिन्हार।।
भ्रष्टाचार मिटाय बर, आय रहिस हे जेन।
मूड़ गोड़ छबड़ा गइस, नाली चिखला तेन।।
अन्ना अन्ना बोलके, बन्ना बनिस लतेल।
तन्ना नन्ना आज हो, अउ ओइलगे जेल।।
सत्ता के महिमा सुनौ, जे नइ बरने जाय।
मरहा मुसुवा मन घलो, घुसघुस ले मोटाय।
सत्ता के महिमा सुनौ, जेन पाय चिकनाय।
देश लूट जनता धिरो, माल डकारत जाय।।
ठग्गू नटवरलाल के, भीड़ लगे दरबार।
भाड़ा के बनिहार मन, हें लगात जयकार।।
मुफतखोर जनता चुनिन, अलकरहा सरकार।
हाथ कुछु आइस नहीं, होगे बंठाधार।।
जेन देश ला बाँट के, चाहै करना राज।
चुन्दी उँकर हपाट के, जँउहर कर दौ आज।।
ईडी के सोंटा परत, बफलत हवँय दलाल।
जेल धंधागे दोखहा, ठग्गू नटवर लाल।।
देश टोर राजा बने, सोचिस नटवरलाल।
आप पाप सब उघरगे, ढ़ोगी भ्रष्ट दलाल।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
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