शोभन छंद
केश मा मोती
गुँथागे, भीजके बरसात ।
होय हे सिंगार
सजवन, संग पिय दिनरात।।
माथ दमकत बन
सुहागी, रंग लाली डार ।।
महमहावत फूल
गजरा, गमक उड़त अपार।।
शोभामोहन
१२/०७/२०२०
*शोभन (सिंहिका) छंद*
लाललाला
लाललाला,लालला लल लाल,
राम भजले राम
गा ले, राख ले मन राम।
छोड़के जग के
भरोसा, छोड़ के धन धाम ।।
राम तारत राम मारत, राम जगत चलात
।
राम भाखत राम
राखत, राम सुख बरसात।।
नेव मंदिर के
खनावत, भक्त मन हरसात।
आस पूरत गजब
जुन्ना, सुख कहे नइ जात।।
लीप अँगना
चँउक पूरत, साज कलश मड़ात।
गाय घी के बार
दियना, हो मगन ओरियात।।
शोभामोहन
*शोभन (सिंहिका) छंद*
लाललाला
लाललाला,लालला लल लाल,
रात छट्ठी जे
लिखागे, वो टरे न मिटाय।
जेन आवय ये जगत मा, तेन दुख
सपड़ाय।।
चक्रवर्ती राज
जेकर, अवध दशरथ राय।
राम लछमन असन
बेटा ,फिरत बन बन हाय।
राम मनखे रूप
धरके, जब अवधपुर आय।
राजराजा
राजरानी, सुखमगन गुन गाय।।
दूध गजरा असन
गदिया, लाक् दसा पउढ़ाय।।
घाँस बन काँदी
सथरिया, आज वो सुसताय।।
शोभामोहन
०१/११/२०२०
*शोभन (सिंहिका) छंद*
तैं किशन काबर
खुसरथस आन घर छुछुवाय
लाललाला
लाललाला,लालला लल लाल,
देत बद्दी बोल
रद्दी, सब गुवालिन घात।
लाज तोला
चिटिक नइ हे, अउ लगै नइ बात।।
घीव गोरस अउ
दही हे, घर म माढ़े खाय।
तैं किशन काबर
खुसरथस,आन घर छुछुवाय।।
चोरहा तोला
कहत हें, देख ग्वालिन आज ।।
सोंच खिसियाही
अबड़ जब, जानही महराज।।
कोन नजराये
घरे के, चीज नहीं सुहाय।
तैं किशन काबर
खुसरथस,आन घर छुछुवाय।।
आज तो तोला न
छोड़ौ, बड़ बिटोथस लाल।
बाँधिहौं रे
ओखली मा, तोर बाढ़त फाल।।
नाम ला बदनाम
करथस, जीव गे कउवाय।
तैं किशन काबर
खुसरथस,आन घर छुछुवाय।।
शोभन छंद
१४/१०
लाललाला
लाललाला, लाललालालाल
२१२२ २१२२ , २१२२ २१
मोर तैं संजोग
कर दे, अपन सन भगवान ।
भोग लेहूँ संग
के सुख, धर अधम तन प्रान ।।
सात भाँवर फिर
सुहागी, जस पिया घर जाय ।
चीज बस भंडार
कूची, पोगरी सपड़ाय ।।
चेत उज्जर
जग्ग होवै, दे इही बरदान ।
मोर तैं संजोग
कर दे, अपन सन भगवान ।
बूँद दहरा मा
समावै, होय दहरा आप ।
तोर कुल समला
मिला दे, काट जम्मो पाप।।
नारदाना जाय
नदिया, मिलय अपन घरान ।
मोर तैं संजोग
करदे, अपन सन भगवान।।
तोर मा जेमन
घुरिन हे, ऋषिपना सुख पाय।
तोर सुपरुद
मोर हस्ती, ओइसनेच मिट जाय ।।
मन उठत हे मन
गिरत हे, मन अबड़ बईमान।।
मोर तैं संजोग
कर दे अपन सन भगवान।।
शोभामोहन
श्रीवास्तव
खुश्बू विहार
कालोनी पाहँदा
१२/०७/२०२०
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