जीव उड़ात पिया सोरियाथे (मत्तगयंद सवैया)
जाय पिया कर साध उथे मन, लाग-नता अउ नाच नचाथें।
सास खड़े मुँहटा कर जाव भला कइसे बड़ जीव डराथे।
संगधरे ननदी तिरबेंगलि काज तियार बड़ा बिलमाथे ।
जेकर नाम हवै जिनगी हर ओकर तो नइ छाँव खुँदाथे।।
बीत जथे रतिहा निंदरी दिनमान, सगा मन सीगबिगाथे।
बाज जथे जब पैजनिया झनकार सुने सब कान लगाथें।
मैं चलथौं उँकरे मनभावत चार मंँझार तभे सहराथें।
जाँव कहूँ अपने मन के तब दोस लगा बड़ गाल बजाथें।
जान सकौं न पिया मन बात भले कतकोन गड़ी अँखियाथे।
मोर कभू मरुवा धरथे तब देवर जेंवन दे कहि आथे।
जेठ कथे चल खेत कती डिंगरी व जेठानिन नीर भराथे।।
मोर मती छरियात सबो अउ जीव उड़ात पिया सोरियाथे।।
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309
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