संगत नंगत हे
बलवान (चकोर सवैया)
जेकर संग करै
जउने हर तेकर रंग चढ़ै अनजान।
जेन गुनागर
संग करै गुनवान बनै अभरै धन धान।
मूरख संग बड़ा
भुगतावय संगत दुष्ट महादुख मान।
संग करौ शुभ के सत
के तुम संगत नंगत हे बलवान।।
संग करै जल वो
घुर जावय खोजय रेंगत ठाँव ढ़लान।
रूप सरूप सबो
बिसरा दय घोर डरै गुन नाम निशान।।
रंग रँगैं जल
संग चलै जल आप मिटा अपने पहिचान।
संग करौ शुभ
के सत के तुम संगत नंगत हे बलवान।।
पावक संग करै
जउने हर आप बनै वह पावक मान।
संग बरै लपटै
झपटै अउ होय पवित्र समान विधान ।
राख करै सब
चीज ल बारत आँच जरोवत जाय उचान।
संग करौ शुभ
के सत के तुम संगत नंगत हे बलवान।।
संग करै जल वो
घुर जावय खोजय रेंगत ठाँव ढलान।
रूप सरूप सबो
बिसरा दय घोर डरै गुन नाम निशान।।
रंग रंगैं जल
संग चलै जल आप मिटा अपने पहिचान।
संग करौ शुभ
के सत के तुम संगत नंगत हे बलवान।।
शोभामोहन
०३/०३ २०२१
No comments:
Post a Comment