Thursday, 16 March 2023

मोतीदाम छंद

 चलै धर सार (मोतीदाम छंद )

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मिले जब पाँच परान अधार।

खिले जग मा कर रूप सिंगार।।

सहे दुख झेल झपेट अपार।

रहे नभ खार चलै धर सार ।।

रमैं नहीं जीव कभू जग लंग ।

उड़ै बन हंस अगास असंग ।।

तजै जग पाँच पदारथ भार ।

सबो ल बिसार चलै धर सार।।

शोभामोहन श्रीवास्तव

१७/०८/२०२०

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