Thursday, 16 March 2023

सोमराजी छंद 122 122

 

सोमराजी छंद

122 122

पिये सोन पानी।

सबो लागमानी।।

पुरे हे कहानी।

घुरे ढ़ेलवानी।।

सबो मा नदानी।

पियै कोन मानी।।

करै हीनमानी।

चिन्हैं बीन बानी।

कहावै सुजानी।

कुजानी गुमानी।।

मया के कहानी।

फिरे आज पानी।।

कहूँ लोग दानी।

कहूँ सूम बानी ।।

कहूँ खानदानी।

कहूँ विग्य ग्यानी।।

शोभामोहन श्रीवास्तव

 

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