Tuesday, 21 July 2020

शोभन छंद १४/१०
लाललाला लाललाला, लाललालालाल
२१२२ २१२२ , २१२२ २१
मोर तैं संजोग कर दे, अपन सन भगवान ।
भोग लेहूँ संग के सुख, धर अधम तन प्रान ।।
सात भाँवर फिर सुहागी, जस पिया घर जाय ।
चीज बस भंडार कूची, पोगरी सपड़ाय ।।
चेत उज्जर जग्ग होवै, दे इही बरदान ।
मोर तैं संजोग कर दे, अपन सन भगवान ।
बूँद दहरा मा समावै, होय दहरा आप ।
तोर कुल समला मिला दे, काट जम्मो पाप।।
नारदाना जाय नदिया, मिलय अपन घरान ।
मोर तैं संजोग करदे, अपन सन भगवान।।
तोर मा जेमन घुरिन हे, ऋषिपना सुख पाय।
तोर सुपरुद मोर हस्ती, ओइसनेच मिट जाय ।।
मन उठत हे मन गिरत हे, मन अबड़ बईमान।।
मोर तैं संजोग कर दे अपन सन भगवान।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
खुश्बू विहार कालोनी पाहँदा
१२/०७/२०२०

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