श्याम चले तैं ले बाँसुरिया (विष्णुपद छंद )
श्याम चलै तै ले बाँसुरिया
कान म धुन झनके ।
अलथी-कलथी रात पहावत,
सुध बुध नइ तन के।।
साध जरइ दू पाना होवत,
गाज गिरिस झम ले ।
लउकत हे बिजली कस मुहरन,
सुध घन घमघम ले ।।
गाँव गुड़ी घर पनघट नदिया
गत नइ मधुबन के ।
श्याम चले तैं ले बाँसुरिया,
कान म धुन झनके ।।
माखन लोंदी कस मन टघलत,
अउ बोहावत हे ।
भाव नदी के बइहा पूरा,
टोंटा आवत हे ।।
मया मोह हर झूलत हवै,
गरफाँसी बनके ।
श्याम चले तैं ले बाँसुरिया,
कान म धुन झनके ।।
मुठ मारे कस रूख सुखागे,
चुपचुप चुरगुन हे ।
काय मोहनी डारे सबला,,
बस तोरे धुन हे ।।
सब मन मंदिर तँही बिराजत,
जिनगीधन बनके ।
श्याम चले तैं ले बाँसुरिया,
कान म धुन झनके ।।
गोपी ब्याकुल ग्वाला ब्याकुल,
अउ जसुदा मइया ।
ब्याकुल हावय नंद गँउटिया
अउ बछरू गइया ।।
नइ आवस तौ हमी आत हन,
उड़त सुआ बन के ।
श्याम चले तैं ले बाँसुरिया,
कान म धुन झनके ।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
खुश्बूविहार कालोनी पाहन्दा
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