झन भुलवार नहीं मैं मानौ
छोटे-मोटे जिनिस बजरहा ।
चारे दिन चलइया सरहा ।।
देये ले अब मैं न इ मानौ।
झन भुलवार नहीं मैं मानौ।।
जगमाया किरचा गड़गे हे ।
पुन बढ़गे हे धुन चढ़गे हे ।।
गुन भर दिन अउ रात बखानौ ।
झन भुलवार नही मैं मानौ।।
शोभामोहन पर लागत जग ।
का परगोती का असलग सग ।।
अब नइ अउ जर मूल उखानौ ।
झन भुलवार नहीं मैं मानौं।।
शोभामोहन
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